रिलीज को तैयार है केशव आर्य की फिल्म ‘अंतर्व्यथा’

पटना: नेशनल-इंटरनेशनल फिल्‍म फेस्टिवल में धूम मचाने के बाद केशव आर्य की फिल्म ‘अंतर्व्यथा’ अब रिलीज के लिए तैयार है। ‘अंतर्व्यथा’ मूवी की यह खुशकिस्मती है कि फिल्म फेस्टिवल्स का दौरा करने के बाद यह फिल्म दिसम्बर में  रिलीज हो रही है।

अब तक 14 फिल्म फेस्टिवल्स में इसे 8 अवार्ड्स मिल चुके हैं जिसमे बेस्ट डेब्यू फिल्म मेकर, बेस्ट डायरेक्टर, बेस्ट एक्टर के अवार्ड शामिल हैं। उक्त बातों की जानकारी पटना में आयोजित एक प्रेस वार्ता सम्मेलन में दीं गयी। प्रेस वार्ता सम्मेलन मे फ़िल्म के निर्माता निर्देशक सहित अभिनेता कुलदीप सरीन , बालवीर  सीरियल की लीड एक्ट्रेस अनुराधा ख़ैरा व प्रसिद्ध बोलीवुड अभिनेता केशव आर्य मौजूद रहें।

केशव इस फिल्म की रिलीज को लेकर बेहद उत्साहित हैं। मूवी का प्रोमो रिलीज़ हो चुका है, जिसे लाखों लोग देख चुके है और  पसंद कर रहे हैं। केशव आर्य के लिए फ़िल्म को रिलीज करना एक बोहोत बड़ा चैलेंज था। लेकिन प्रोड्यूसर भरत कवाड़, दिनेश अहीर, दीपक वशिष्ठ और को – प्रोड्यूसर अक्षय यादव ने इस चैलेंज आसान बना दिया। इनकी मेहनत से फ़िल्म रिलीज के लिए तैयार है।

इस फ़िल्म में कबीरा फेम तोची रैना ने  खुबसूरत संगीत दिया है।  इसमें कुल चार गाने हैं।  जिसमे दो गानों को तोची रैना ने अपनी खूबसूरत आवाज़ दी है। फिल्म में हेमंत पाण्डेय, कुलदीप सरीन, गुलशन पाण्डेय, अनुराधा खैरा, वीना चौधरी  जैसे कलाकार हैं। केशव आर्या ने भी इसमें अदाकारी की है।

सुशीला मीडिया टेक प्राइवेट लिमिटेड के बैनर तले बनाई गई फिल्म ‘अंतर्व्यथा’ की वन लाइनर बताते हुए केशव आर्य  कहते हैं, ”देखिये, हर आदमी की एक अंतर्व्यथा होती है फिल्म इसी वन लाइनर पर बेस्ड है।  हम बचपन में अक्सर झूठ बोल देते हैं, लेकिन मन में यह लगा रहता है कि हमने झूठ बोला है और सारी उम्र इंसान उस झूठ बोलने की गलती को महसूस करता रहता है।  अपनी गलतियों को तो इन्सान दुसरे लोगों से छुपा सकता है, लेकिन वह उसे अपने आप से नहीं छुपा पाता।  इन्सान को अपनी उस गलती के नतीजे में पैदा हुए अंदरूनी वेदना को झेलना ही पड़ता है। उसे अपने आप से जद्दोजहद करनी ही पड़ती है। यह मूवी यही दर्शाती है। ”

फिल्म के निर्देशक और एक्टर केशव आर्य ने बड़ी मेहनत, लगन और शिद्दत से फिल्म ‘अंतर्व्यथा’ बनाई है।  बकौल निर्देशक केशव आर्य ”मेरे लिए यह फिल्म बेहद खास है और इसे बनाने में मुझे कई मुश्किलें आईं, मगर मेरा मानना है कि उन्हीं के ख्वाब पुरे होते हैं जिनके सपनो में जान हो, पैरों से कुछ नहीं होता इरादों में उड़ान हो।”

 

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